Vindavan dham-Hindi

 

श्रीकृष्ण का गोकुल से वृन्दावन आगमन-बृजमण्डल के माहात्म्य का वर्णन-




यमुना के तट पर अनेक प्राण खेलते हैं वह दिव्य पुष्प पारिजात के कुंज हैं और श्री राधा-कृष्ण एकदुसरे के साथ बिहार करते हैं।मेरे लिये मंगलमय हो। समय बीतता गया और समय के साथ गोकुल पर कंस के हमले भी बढ़ते गये। एक दिन नंदराय ने गाँव के बुजुर्गों के साथ बैठक की।

नंदजी ने कृष्ण और बलराम को अपनी गोद में ले लिया और कहा, "हम सभी को कहीं और जाना चाहिए।" यहाँ एक बड़ी समस्या है, हम सभी को वृन्दावन जाना चाहिए, जब सब शांत हो जायेंगे तो हम वापस आ जायेंगे।”वृन्दावन के सम्बन्ध में परम बुद्धिमान सानन्दजी ने पूछा- वृन्दावन इतनी दूर है, वहाँ कैसा सुख है।


वृन्दावन के बारे में- ब्रह्मास्त से इसांकोन तक
, युदुपुर से दक्षिण तक तथा शौणपुर से पश्चिम तक की भूमि को मथुरा मण्डल कहा जाता है। मथुरा मंडल के अंदर बिश योजना तक फैला भूमि का भाग महा ज्ञानी लोगो ने मथुरा मंडल या ब्रज बताया है|   वसुदेवजी के घर पर रुका और सुना कि तीर्थराज प्रयाग ने भी यहां पूजा की है। मथुरा क्षेत्र में बहुत सारे स्थान हैं और उनमें से वृन्दावन वह स्थान है जहाँ भगवान ने बहुत कृपा की है।

कहानी से सीख-      कण-कण में भगवान का वास है। भगवान हर जगह है.| 

                                          ||जय श्री कृष्ण||

                            

 

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