shri Hari vishnu Varahavtar in Hindi

 

||भगवान विष्णु के वराहवतार की कथा||

  ||पृथ्वी का अभिमान दूर करना||

 

 

परिचय- वराह भगवान विष्णु के तीसरे अवतार हैं। जब हिरण्याक्ष पृथ्वी को रसातल में ले गया। अत: पृथ्वी की रक्षा के लिए श्रीहरि ने वराह अवतार लिया।


वराहावतार में श्रीहरि ने अपने दाँतों पर उठाकर पृथ्वी की रक्षा की थी।

उस समय जल में जाते समय पृथ्वी वराह रूपी भगवान जनार्दन के सामने बैठ गई और बोली- प्रभु, सारा जगत जल से भरा हुआ है, आप मुझे कहां रखेंगे?

श्री हरि ने कहा - जब वृक्ष दिखायी दे और जल कम  हो जायेगा जब तुम्हारी स्थापना होगी।

पृथ्वी बोली - भगवान सभी की स्थापना मेरे ऊपर हुई है। क्या, कोई और भी दूसरी पृथ्वी है।

पृथ्वी तो केवल मैं ही हूं।“

   यह कहते हुए पृथ्वी ने सामने जल में सुन्दर वृक्षों को देखा और उसका अभिमान दूर हो गया। उसने भगवान से कहा - "प्रभु! यह कौन सी जगह है? मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।"


  श्रीहरि ने कहा - पृथ्वी - "यह सामने दिव्य मथुरा-बृज मंडल है जो गोलोक धाम से जुड़ा हुआ है। पल्यकाल में इसका विनाश नहीं होगा।

 यह सुनकर पृथ्वी का अहंकार नष्ट हो गया। बृज की महिमा का वर्णन किया गया है। जिसका स्थान तीर्थराज प्रयाग से भी ऊंचा है।

                 || जय बृज-मण्डल ||

                  ||जय श्री कृष्ण ||

 

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